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5G क्या है और ये इंडिया मे कब आएगा?

क्या आप जानते हैं की 5G क्या है? ये 5G Technology कैसे काम करती है? मेह्जुदा 4G के मुकाबले ये 5G किस माईने में बेहतर है? इन्ही सभी चीज़ों के विषय में अगर आपको जानना है तब आपको ये post जरुर पढनी होगी. फोन और हमारा रिश्ता काफी पुराना है और उतना ही मजबूत भी.

जहाँ पहले के फ़ोन wire वाले हुआ करते थे, फिर cordless का ज़माना आया और अब wireless phone का दोर चल रहा है. पहले के basic phones के जगह अब के generation के लोग Smart Phones का इस्तमाल करते हैं. फ़ोन के इस बदलते रूप रंग के साथ उसकी generation भी जुडी हुई होती है जो की 1G से 4G का सफ़र तो तय कर चुकी है और अब आगे 5G की तरफ अपना रुख का रही है. ऐसे में ये जानना काफी रोचक हो सकता है की ये आने वाली 5G क्या है?

इसमें इस्तमाल होने वाली Technology क्या है और ये कैसे मेह्जुदा Mobile Industry में बदलाव ला सकती है. इससे कैसे लोग उपकृत हो सकते है, इत्यदि.

अगर हम पिछले कुछ वर्षों को देखें तब हम ये जान सकेंगे की प्रति 10 वर्षों में Mobile Technology के field में एक generation की बढ़ोतरी हो रही है. जैसे की शुरुवात हम First Generation (1G) सन 1980s में, Second Generation (2G) सन 1990s में, Third Generation (3G) सन 2000s में, Fourth Generation (4G) सन 2010s में, और अब Fifth Generation (5G) की बरी है.

हम धीरे hire ज्यादा sophisticated और smarter technology की और रुख कर रहे हैं. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को 5G क्या है और ये कैसे काम करता है के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे आपको भी इस नयी technology के विषय में जानकारी हो. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की 5G नेटवर्क क्या है और 5G इंडिया में कब आएगा?

5G क्या है – 5G Technology in Hindi

5G नेटवर्क मोबाइल संचार की आने वाली पीढ़ी है, जिसकी गति और क्षमता हमारे वर्तमान 4जी से 100 गुना तेज होगी।

5G नेटवर्क से बहुत अधिक डेटा दर, कम विलंबता और बेहतर विश्वसनीयता की पेशकश करने की उम्मीद है।

इसका मतलब है कि 5G नेटवर्क कम दूरी पर अधिक डेटा संचारित करने में सक्षम होंगे, जो संवर्धित वास्तविकता और स्वायत्त कारों जैसे नए उपयोग के मामलों को सक्षम करेगा।

अगली पीढ़ी का सेलुलर नेटवर्क नई तकनीकों की एक श्रृंखला का समर्थन करेगा जो अभी तक व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, जैसे स्वायत्त वाहन, आभासी वास्तविकता (वीआर), संवर्धित वास्तविकता (एआर) और बहुत कुछ। यह उम्मीद की जाती है कि 5G 2023 तक 20 गीगाबाइट प्रति सेकंड (GB / s) या इससे अधिक की गति का समर्थन करेगा।

4G नेटवर्क, जिसे एलटीई के नाम से जाना जाता है, 2009 में पेश किया गया था और इसे दुनिया भर के वाहकों द्वारा व्यापक रूप से अपनाया गया है। 5G और 4G के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि जहां 4G नेटवर्क मुख्य रूप से क्षमता पर केंद्रित होते हैं, वहीं 5G नेटवर्क क्षमता और विलंबता या गति दोनों पर केंद्रित होंगे।

5G networks और services को कई stages में deploy किया जायेगा next कुछ वर्षों में जो की बढती mobile और internet-enabled devices की जरुरत हो आसानी से पूर्ण कर सके. Overall, की बात करें तब 5G के माध्यम से हम बहुत variety के नए applications को generate कर सकते हैं.

भारत में अभी 4G का विस्तार हो रहा है मगर दुनियाभर के टेलिकॉम ऑपरेटर्स मोबाइल टेक्नॉलजी की अगली जेनरेशन 5G लाने की तैयारी में जुट गए हैं। इसीलिए उसने 5G लाने की तैयारी शुरू कर दी है।

5G Technology के Features

अभी हम कुछ विशेष 5G technology features के संधर्व में जानते हैं. चलिए जानते हैं की आखिर 5G Technology में ऐसे क्या नए features है जो की मेह्जुदा network technology में नहीं है.

  • इसमें Up to 10Gbps data rate का होना. इसके साथ 10 to 100x की rate में network improvement होना 4G और 4.5G networks की तुलना में.
  • 1 millisecond latency का होना
  • इसमें 1000x bandwidth per unit area का होना
  • इसमें हम Up to 100x number के connected devices per unit area (अगर हम 4G LTE के साथ तुलना करें) तक connect कर सकते हैं
  • ये सभी time available होता है. इसलिए इसकी 99.999% तक availability है
  • इसके अलावा ये 100% coverage प्रदान करता है
  • ये energy save करने में काफी मदद करता है. जिसके चलते ये लगभग 90% तक network energy usage कम करने में मदद करता है
  • इसमें आप low power IoT devices जो की करीब 10 सालों तक आपको power प्रदान कर सकती है का इस्तमाल कर सकते हैं
  • इसमें High increased peak bit rate होती है
  • ज्यादा data volume per unit area (i.e. high system spectral efficiency) होती है
  • ज्यादा capacity होती है जो की इसे ज्यादा devices के साथ concurrently और instantaneously connect होने में मदद करती है
  • ये Lower battery consumption करती है
  • ये बेहतर connectivity प्रदान करती है किसी भी geographic region की अगर आप बात करें तब
  • ये ज्यादा नंबर की supporting devices को support कर सकती है
  • इसमें infrastructural development करने में काफी कम लागत लगती है
  • इसके communications में ज्यादा reliability होती है

5G Technology कैसे काम करता है

Wireless networks में मुख्य रूप से cell sites होते हैं जिन्हें की sectors में divide किया गया होता है जो की radio waves के माध्यम से data send करते हैं. ये कहना गलत नहीं होगा की Fourth-generation (4G) Long-Term Evolution (LTE) wireless technology ने ही 5G का foundation तैयार किया था.

जहाँ 4G, में बड़े, high-power cell towers की जरुरत होती है signals को radiate करने के लिए longer distances में, वहीँ 5G wireless signals को transmit करने के लिए बहुत सारे small cell stations की जरूरत होती है जिन्हें की छोटी छोटी जगह जैसे की light poles या building roofs में लगाया जा सकता है.

यहाँ पर multiple small cells का इस्तमाल इसलिए होता है क्यूंकि ये millimeter wave spectrum में — band of spectrum हमेशा 30 GHz से 300 GHz के भीतर ही होती है और चूँकि 5G में high speeds पैदा करने की जरुरत होती है, जो की केवल short distances ही travel कर सकता है.

इसके अलावा ये signals किसी भी weather और physical obstacles, जैसे की buildings से आसानी से interfere हो सकते हैं.

यदि हम पहले generations के wireless technology की बात करें तब इसमें spectrum की lower-frequency bands का इस्तमाल होता था. इसके साथ millimeter wave challenges जिससे की distance और interference ज्यादा होती है, इससे जूझने के लिए wireless industry ने 5G networks में lower-frequency spectrum का इस्तमाल करने का सोचा है जिससे Network operators उस spectrum का इस्तमाल कर सकें जो की उनके पास पहले से ही मेह्जुद है.

एक चीज़ हमें ध्यान रखना चाहिए की Lower-frequency spectrum हमेशा ज्यादा distances cover करती है लेकिन इसमें lower speed और capacity होती है millimeter wave की तुलना में.

भारत में 5G नेटवर्क लॉन्च तिथि

DoT ने 2022 के अंत तक भारत के 13 शहरों में 5G नेटवर्क की स्थापना की पुष्टि की है, जिसमें मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, गुरुग्राम, बैंगलोर, चंडीगढ़, अहमदाबाद, जामनगर, हैदराबाद, पुणे, लखनऊ और गांधीनगर जैसे शहर शामिल हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, Jio, Airtel और यहां तक ​​कि Vodafone ने पहले ही 13 शहरों में अपनी परीक्षण साइटें स्थापित कर ली हैं, जिन्हें 5G सेवाएं मिलने की उम्मीद है। रिपोर्टों के अनुसार, एयरटेल और जियो ने भारत में 5जी सेवाओं को शुरू करने वाले पहले ऑपरेटर होने का दावा किया है।

Types of 5G wireless services available

Network operators मुख्य रूप से दो प्रकार के 5G services प्रदान करते हैं. पहला Service है 5G fixed wireless broadband services का जो की internet access deliver करती है घरों और businesses को बिना किसी wired connection के उनके premises तक.

ऐसा करने के लिए network operators NRs को deploy करते हैं छोटे cell sites में buildings के निकट जिससे ये कोई signal को beam कर पाए receiver तक जो की किसी rooftop या windowsill में मेह्जुद हो, इससे ये premises के भीतर amplified हो जाता है.

Fixed broadband services operators के लिए भी सस्ता हो जाता है service प्रदान करने के लिए क्यूंकि इस approach के द्वारा उन्हें प्रत्येक residence को fiber optic lines बिछाने की जरुरत नहीं पड़ती है, बल्कि केवल cell sites तक ही fiber optics install करनी होती है, और customers broadband services receive करते हैं wireless modems के द्वारा जो की उनके residences या businesses में स्तिथ होता है.

दूसरा Service है 5G cellular services का जो की user को operator के 5G cellular networks service को access करने की सुविधा प्रदान करती है. ये services सबसे पहले rolled out होगी सन 2019 में, जब पहली 5G-enabled devices commercially available होंगी खरीदने के लिए.

Cellular service की delivery भी निर्भर करती है mobile core standards के completion के ऊपर 3GPP के द्वारा. उम्मीद की जा रही है की ये 2018 के ख़त्म होने तक complete हो जाएगी.

5G के Advanced Features क्या हैं?

यदि हम पहले के radio technologies के साथ इस नयी 5G technology की तुलना करें तब इसमें ये following advancement हम देख सकते हैं जैसे की −

  • इसमें हम Practically super speed जो की है 1 से 10 Gbps को पा सकते हैं.
  • यहाँ पर Latency होगी 1 millisecond (end-to-end round trip में).
  • इसके साथ यहाँ पर 1,000x bandwidth per unit area होती है.
  • ये बहुत ही आसानी से 10 से 100 devices तक connect हो सकता है.
  • ये Worldwide coverage प्रदान करता है.
  • इसके अलावा लगभग 90% की energy reduction में इसका हाथ है.
  • इसमें Battery life बहुत ही लम्बी होती है दूसरों के मुकाबले.
  • इसका साथ यहाँ पर पूरी दुनिया एक wi fi zone बन जाती है.

5G की स्पेक्ट्रम बैंड क्या है?

5G नेटवर्क्स 3400 MHz , 3500 MHz और 3600 MHz बैंड्स पर रन करते हैं। 3500 MHz बैंड को आदर्श माना जाता है। मिलीमीटर वेव स्पेक्ट्रम 5G में अहम भूमिका निभा सकता है। इन्हें मिलीमीटर वेव्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी लेंग्थ 1 से 10 mm होती है।

मिलीमीटर तरंगें 30 से 300 GHz फ्रिक्वेंसीज़ पर काम करती हैं। अभी तक इन तरंगों को सैटलाइट नेटवर्क्स और रडार सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर 5G में मिलीमीटर वेव्स इस्तेमाल की जाती हैं तो इसका श्रेय सर जगदीश चंद्र बोस को भी जाएगा। उन्होंने 1895 में ही दिखाया था कि इन वेव्स को कम्यूनिकेशन के लिए यूज किया जा सकता है।

5G से क्या लाभ है?

5G का पहला फायदा यह है कि यह 4जी के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज डाटा स्पीड देने में सक्षम होगा। इसका मतलब है कि वीडियो स्ट्रीमिंग या बड़ी फ़ाइलों को डाउनलोड करते समय बहुत कम बफरिंग होगी।

एक और फायदा यह है कि इसमें 4G नेटवर्क की तुलना में काफी कम लेटेंसी होगी। इसका मतलब है कि ऑनलाइन गेम खेलते समय या फोन पर किसी से बात करते समय कम अंतराल होना चाहिए, उदाहरण के लिए।

5G नेटवर्क डिजिटल कनेक्टिविटी की दुनिया में क्रांति लाने के लिए तैयार हैं। यह न केवल तेज डेटा दर और बेहतर विलंबता प्रदान करेगा बल्कि स्वायत्त कारों, IoT उपकरणों, और बहुत कुछ जैसे नए उपयोग के मामलों का भी समर्थन करेगा।

5G नेटवर्क IMT-2020 नामक एक नई एयर इंटरफेस तकनीक पर आधारित होगा जो मोबाइल नेटवर्क के प्रदर्शन में 10 गुना सुधार करने के लिए तैयार है। इसका मतलब है कि 5G नेटवर्क निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगा:

  • तेज़ डाउनलोड गति
  • बेहतर विलंबता
  • अधिक उपकरणों के लिए समर्थन
  • बड़ी मात्रा में डेटा संचारित करने की क्षमता
  • कम बिजली की खपत

5G से क्या नुकसान है?

5G के फायदों के बावजूद, यह इसके नुकसान के बिना नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण नुकसान यह है कि इसे स्थापित करने के लिए 4G से अधिक टावरों की आवश्यकता होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि उच्च आवृत्ति का अर्थ है कम दूरी और सिग्नल देने के लिए अधिक शक्तिशाली ट्रांसमीटरों की आवश्यकता होती है।

5जी नेटवर्क का दूसरा नुकसान यह है कि नए इंफ्रास्ट्रक्चर की तैनाती महंगी होगी। 5G नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी नए उपकरण और टावरों को स्थापित करने में अरबों डॉलर का खर्च आएगा, जिसे पूरा होने में दशकों लग सकते हैं।

  • 5G नेटवर्क सभी क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं है।
  • उपभोक्ताओं के लिए 5G नेटवर्क महंगा है।
  • 5G नेटवर्क उच्च मात्रा डेटा आवश्यकताओं के लिए एक आदर्श समाधान नहीं है।

5G के Applications क्या हैं?

चलिए जानते हैं कुछ significant applications के विषय में

  • ये पूरी दुनिया के लिए एक unified global standard बन सकता है.
  • इसके द्वारा Network availability चारों तरफ होगी जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस बेहतरीन technology का इस्तमाल कर सकेंगे कभी भी और कहीं भी.
  • इसमें IPv6 technology होने के कारण, mobile की IP address को उनके connected network और geographical position के हिसाब से प्रदान किया जायेगा.
  • ये पूरी दुनिया को एक real Wi Fi zone में तब्दील कर देने की क्षमता रखता है.
  • इसके cognitive radio technology के माध्यम से radio technologies के अलग अलग version समान spectrum को efficiently इस्तमाल कर सकते हैं.
  • इस technology के माध्यम से higher altitude के लोग बड़े आसानी से radio signal की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं.

5G इंडिया में कब आएगा

आप सोच रहे होंगे के 5G मोबाइल कब लॉंच होगा? सरकार ने 5G स्पेक्ट्रम के लिए ऑक्शन की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार ने ट्राई से कहा है कि 3400 से 3600 MHz बैंड्स की नीलामी के लिए शुरुआती दाम सुझाए. ट्राई ने इसपर काम शुरू कर दिया है. डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम जल्द ही इस संबंध में एक पॉलिसी भी ला सकता है.

दरअसल एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में 5G जैसी फास्ट वायरेलस टेक्नॉलजी लाने से पहले डेटा होस्टिंग और क्लाउड सर्विसेज के लिए रेग्युलेटरी कंडिशंस में बदलाव लाया जाना चाहिए.

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