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रेडियो का आविष्कार किसने किया?

रेडियो का आविष्कार किस वैज्ञानिक ने किया? पिछले कुछ सालो से भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन्स दोनों ही काफी सस्ते हो गए हैं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स का साम्राज्य तो बढा लेकिन टेलीविजन का महत्व पहले जैसा नही रहा. टेलीविजन तो अब भी काफी लोग देख रहे हैं लेकिन इन उन्नत तकनीकों के बाजार में आने से रेडियो का तो इस्तेमाल ही काफी कम हो गया. अब रेडियो या तो केवल शौकीन लोग सुनते है या कार में ड्राइविंग के दौरान सुना जाता हैं. लेकिन यह नई तकनीके भी रेडियो के अविष्कार के बाद ही सम्भव हो पाई हैं.

आज के समय में एंटरटेनमेंट के साधनों की कोई कमी नही हैं. रेडियो तकनीकी को शुरुआत में सरकार के साथ रहीसो ने काम में लिया लेकिन जब यह तकनीकी थोड़ी सस्ती हुई तो रेडियो साधारण वर्ग के लोगो की पहुच में भी आने लगा.

पहले रेडियो का इस्तेमाल केवल खबरों के प्रसारण के लिए किया जाता था लेकिन बाद में यह मनोरंजन का एक जरिया भी बन गया. आज के समय के लोगो को रेडियो के अविष्कार का महत्व समझ नही आएगा लेकिन अगर उस समय रेडियो का अविष्कार न हुआ होता तो आज की संचार व्यवस्था शायद आज जैसी ना होती.

अगर आप नही जानते की ‘रेडियो का आविष्कार किसने किया था‘ तो यह लेख पूरा पढ़े.

रेडियो क्या है?

रेडियो का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एफएम के चित्र आना धुर हो जाते हैं लेकिन असलियत में वह केवल एक यंत्र हैं. रेडियो के पूरी तकनीकी है जिसमे बिना तार के माध्यम से सन्देश एक जगह से दूसरी जगह भेजे जाते हैं. आज के समय के सभी बड़े-बड़े संचार के साधन और उपकरण रेडियो तकनीकी पर भी आधारित हैं.

सरल भाषा में रेडियो को समझा जाए तो यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी हैं जिसमे Radio Waves (रेडियो तरंगों) का इस्तेमाल करते हुए सिग्नल दिए जाते है या फिर एक दूसरे से कम्युनिकेट किया जाता हैं.

आज की उन्नत रेडियो तकनीकी के जरिये हम एक रेडियो स्टेशन से रेडियो तरंगों के माध्यम से लाखो या करोड़ो लोगो को भी मेसेज दे सकते हैं. Radio Waves (रेडियो तरंगे) एक प्रकार की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे होती है जिसकी फ्रीक्वेंसी 30Hz से लेकर 300GHz तक होती हैं.

रेडियो तरंगे एक ट्रांसमीटर के द्वारा जनरेट की जाती हैं जो की एंटीना से जुड़ा होता हैं. इन तरंगों को रिसीव करने वाले डिवाइज को रेडियो रिसीवर कहा जाता हैं जिसमे भी एक एंटीना होता हैं. वर्तमान में रेडियो काफी ज्यादा उपयोग की जाने वाली आधुनिक तकनीक हैं. राडार, रेडियो नेविगेशन, रिमोट कंट्रोल, रिमोट सेंसिंग आदि इसी पर आधारित हैं.

रेडियो कम्युनिकेशन का उपयोग टेलीविजन के ब्रॉडकास्ट, सेल्फोन्स, टू-वे रेडियो, वायरलेस नेटवर्किंग और सेटेलाइट कम्युनिकेशन आदि में किया जाता हैं. वही रेडियो आधारित राडार टेक्नोलॉजी से एयरक्राफ्ट, शिप, स्पेसक्राफ्ट, मिसाइल आदि को ट्रैक और लोकेट किया जाता हैं.

इसमे राडार के ट्रांसमीटर से तरंगे छोड़ी जाती हैं जो की एयरक्राफ्ट जैसे ऑब्जेक्ट्स रिफ्लेक्ट करते हैं जिनसे उनकी सटीक लोकेशन पता चलती हैं. हमारे द्वारा रोजाना उपयोग की जाने वाली GPS और VOR जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी भी रेडियो प्रौद्योगिकी पर ही आधारित हैं.

रेडियो का आविष्कार किसने किया था?

रेडियो का आविष्कार गूल्येलमो मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने किया था.

रेडियो तकनीकी के आविष्कार ने हमारे जीवन को काफी आसान बना दिया हैं. उद्योगों के साथ देश के डिफेंस सिस्टम में भी रेडियो तकनीक का उपयोग इसके अविष्कार को और भी महत्वपूर्ण बना देता हैं. आज की पूर्ण विकसित रेडियो तकनीक में कई वैज्ञानिकों और विद्वानों का योगदान हैं.

यहाँ तक की अगर आप गूगल पर ‘Who Invented Radio‘ सर्च करोगे तो आपको 3 नाम Guglielmo Marconi, Reginald Fessenden और William Dubilier जवाब के रूप में मिलेंगे. एंकर अलावा और भी न जाने कितने बुद्धिजीवियों का योगदान रेडियो के आविष्कार में हैं. लेकिन रेडियो के अविष्कार का मुख्य श्रेय ‘Guglielmo Marconi’ को ही दिया जाता हैं.

Guglielmo Marconi (गुलिएल्मो मारकोनी) को रेडियो तकनीकी का मुख्य अविष्कारक माना जाता हैं. 1880 के दशक में Heinrich Rudolf Hertz के द्वारा ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों’ की खोज के बाद गुगलैल्मो मारकोनी ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस तकनीकी का उपयोग करते हुए लम्बी दूरी के संचार के लिये एक सफल उपकरण तैयार किया.

इसी कारण उन्हें रेडियो का आविष्कारक माना जाता हैं. उस समय विशेषज्ञों के द्वारा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के अध्ययन के लिये उपकरण तैयार किये जा रहे हैं. गुलिएलमो मारकोनी ने पहला सफल उपकरण तैयार किया.

गुलिएल्मो मारकोनी के आविष्कार के बाद सन 1900 में 23 दिसम्बर को एक केनेडियन आविष्कारक Reginald A. Fessenden ने इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक तरंगों का उपयोग करते हुए 1.6 किलोमीटर की दूरी से सफलतापूर्वक एक ऑडियो भेजी. वह ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति बने.

इसके 6 साल बाद 1906 में Christmas Eve ने पहला पब्लिक रेडियो प्रोडकास्ट किया. धीरे धीरे इसका उपयोग बढ़ा और 1910 के आसपास इस वायरलेस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम को ‘Radio’ (रेडियो) का नाम मिला.

रेडियो का आविष्कार कब हुआ

1880 की दशक में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंग की खोज हुई. यह खोज Heinrich Rudolf Hertz ने की थी. इसके ऊपर एक किताब बनाई गयी जिसमे इस विषय की पुरानी विफल खोजो और हर्ट्ज के द्वारा सफलतापूर्वक खोज के साथ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के बारे में डिटेल में जानकारी दी गयी.

यह किताब पूरी दुनिया के विशेषज्ञों ने पड़ी जिनमें से एक जगदीश चंद्र बसु भी थे. बसु ने उस किताब पर इतना प्रभाव डाला की उन्होंने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों पर आधारित एक उपकरण बनाया.

एक वैज्ञानिक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने दूर रखी एक घण्टी को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के माध्यम से बजाकर दिखाया था. उस समय यह एक अविश्वसनीय बात थी. यह मार्कोनी के अविष्कार से भी पहले की बात हैं.

इसके बाद ही गुलिएल्मो मार्कोनी ने रेडियो का आविष्कार किया. मार्कोनी ने रेडियो का अविष्कार 1890 के दशक में किया था. यूएस पेटेंट रिकार्ड्स के अनुसार ‘गुलिएल्मो मार्कोनी ने रेडियो का अविष्कार 1896 में किया’ था.

इसी साल उन्हें रेडियो के अविष्कार के लिए पेटेंट किया गया था. गुलिएल्मो मार्कोनी का आधिकारिक तौर से रेडियो का आविष्कारक माना जाता हैं.

 रेडियो का इतिहास

रेडियो का आविष्कार को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार उनमें से एक माना जाता है. आज के आधुनिक रेडियो सिस्टम का श्रेय किसी एक वैज्ञानिक को नही दिया जा सकता हैं. रेडियो के आविष्कार का इतिहास थोड़ा बड़ा नज़र नज़र आता हैं. एक ब्रिटिश वैज्ञानिक James Clerk Maxwell ने रेडियो के आविष्कार की शुरुआत की.

वह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों पर काम किया करते थे. वह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का सटीक सिद्धांत नही दे पाए. इसके बाद ब्रिटिश वैज्ञानिक Oliver Heaviside ने इस खोज को आगे बढ़ाया लेकिन वह भी सटीक रूप से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को नही समझा पाए.

इसके बाद आख़िरकार Heinrich Rudolf Hertz  ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों की सफलतापूर्वक खोज की. उन्हें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों से जुड़े मुख्य सवालो का जवाब ढूंढने में सफलता मिली. हर्ट्ज की खोज के बाद जगदीश चन्द्र बसु और ओलिवर लॉज जैसे वैज्ञानिकों ने खोज को आगे बढ़ाया.

आख़िरकार सन 1896 में गुलिएल्मो मार्कोनी ने रेडियो का आविष्कार किया. शुरुआत में इस खोज का उपयोग सेनाओं ने किया लेकिन बाद में खोज के कारीगर साबित होने के कारण सरकारें भी इसका इस्तेमाल करने लगी. बीबीसी जैसी कई बड़ी कम्पनियो ने पॉडकास्टिंग के लिए रेडियो तकनीकी का उपयोग करना शुरू कर दिया.

भारत में पहली बार 1920 में मुम्बई से रेडियो प्रसारण शुरू किया गया इसके लियर मुम्बई में रेडियो क्लब तैयार किया गया. 1923 में मुम्बई के रेडियो क्लब से पहले बड़े कार्यक्रम का रेडियो से प्रसारण किया गया. इसके बाद 1927 में मुम्बई और कलकत्ता में निजी स्वामित्व वाले 2 ट्रांसमीटरों से प्रसारण सेवा की स्थापना हुई.

1930 में ट्रांसमीटरों को सरकार के नियन्त्रण में ले लिया और ‘भारतीय प्रसारण सेवा’ के नाम से प्रसारण शुरू किया जिसका नाम बाद में ‘आल इंडिया रेडियो’ कर दिया गया था. आजादी के बाद AIR ने रेडियो को आगे बढ़ाना शुरू किया. हर शहर में AIR के कार्यालय बनाए गए और रेडियो प्रसारण घर-घर तक पहुचने लगा.

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